हिंदी गद्यांश महत्वपूर्ण क्विज 19

नगर हमारा प्राकृतिक निवास स्थान नहीं है। मनुष्य की काम-धंधे की आवश्यकताओं एवं इच्छाओं से हमने नगरों में निवास कर लिया है। परमात्मा की यह इच्छा कदापि नहीं थी कि हम विश्व में आकर ईंट, लकड़ी तथा पत्थरों की गोदी में पलकर मनुष्य बनें। हमारे कार्यालयों तथा नगरों के साथ फल, फूल, पत्ते, चाँद, सूरज आदि का कदापि कोई संबंध नहीं है। यह नगर हमें रस से परिपूर्ण प्रकृति की गोदी से छीनकर अपने तपे हुए पेट में डालकर पचा डालते हैं एवं झुलसा देते हैं। परंतु जिन व्यक्तियों को इनमें रहने का स्वभाव पड़ गया है और जो सदा व्यापार के नशे में लीन रहते हैं वे धीरे-धीरे अपने वास्तविक स्वभाव तथा अपनी प्रकृति को नष्ट करके इस विशाल जगत से पृथक् होते चले जाते हैं।______________ 1. 'जो सदा व्यापार के नशे में लीन रहते हैं' वे-

Correct! Wrong!

2. गद्यांश से हमें संदेश मिलता है-

Correct! Wrong!

3. गद्यांश में मानव का प्राकृतिक निवास स्थान किसे बताया गया है?

Correct! Wrong!

4. नगरों में निवास का कारण है-

Correct! Wrong!

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